1 करोड़ रुपये का जुर्माना, 10 साल तक की जेल… देश में लागू हुआ एंटी पेपर लीक कानून

नीट पेपर लीक के खिलाफ बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। मेडिकल इच्छुक छात्रों के चयन के लिए एनटीए द्वारा परीक्षा आयोजित की जाती है। इसी कड़ी में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए एक निर्णायक कदम में, सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 पेश किया था। यह कानून एनईईटी और यूजीसी-नेट परीक्षाओं को लेकर बड़े पैमाने पर विवाद के बीच लागू हुआ है, जो पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों से घिरी हुई हैं।

अधिनियम का उद्देश्य संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), रेलवे, बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) जैसे प्रमुख निकायों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकना है। यह विधेयक 10 फरवरी को समाप्त हुए बजट सत्र में संसद के दोनों सदनों में पारित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 13 फरवरी को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम), विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी। इसका प्राथमिक उद्देश्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में धोखाधड़ी से निपटना है।

पेपर लीक विरोधी कानून क्या है?

पेपर लीक विरोधी कानून के मुताबिक, पेपर लीक और डमी उम्मीदवारों के इस्तेमाल दोनों के लिए सजा का प्रावधान है। पेपर लीक के मामलों में अपराधियों को 10 साल तक की कैद और 1 करोड़ रुपये का जुर्माना हो सकता है। दूसरों की जगह परीक्षा देने का दोषी पाए जाने वालों को 3 से 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। यदि कोई संस्थान परीक्षा अनियमितताओं में फंसाया जाता है तो परीक्षा का पूरा खर्च उस संस्थान से वसूला जाएगा और संस्थान की संपत्ति भी जब्त की जा सकती है। अधिसूचना भारतीय न्यायिक संहिता को संदर्भित करती है और निर्दिष्ट करती है कि भारतीय दंड संहिता के प्रावधान इसके लागू होने तक प्रभावी रहेंगे।

क्या इस कानून का असर उम्मीदवार पर पड़ेगा?

इस कानून के दायरे में प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थी शामिल नहीं हैं और उनके खिलाफ किसी कार्रवाई का प्रावधान नहीं है. संसद में बिल पेश होने के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एंटी पेपर लीक कानून का उद्देश्य सभी सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता लाना और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को रोकना है। इसलिए उम्मीदवारों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

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