लड़कियों को नौकरी और लग्जरी लाइफ का लालच देकर फंसाता था इमरान

  • महिलाओं के साथ यौन शोषण और धर्मांतरण का मामला पकड़ता जा रहा है तूल

महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के BPO कैंपस से महिलाओं के साथ यौन शोषण और धर्मांतरण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसमें एक के बाद एक कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब TCS धर्मांतरण मामले में मलेशिया कनेक्शन सामने आया है, जिसकी जांच में भी पुलिस जुट गई।

जांच में पुलिस के हाथ व्हाट्सएप चैट्स के जरिए भी कई अहम सबूत लगे हैं, जिसमें मलेशिया के एक संदिग्ध व्यक्ति इमरान की कथित भूमिका भी सामने आई।

जांच में पता चला है कि आरोपी कर्मचारी पीड़ित युवतियों को वीडियो कॉल के जरिए इमरान नाम के इस शख्स से मिलवाते थे। इमरान लड़कियों को इस्लाम अपनाने के लिए विदेश में उच्च वेतन वाली नौकरी और लग्जरी लाइफ का लालच देता था। पुलिस को इमरान एक कट्टरपंथी उपदेशक होने का संदेह है, जो अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है।

मामले पर नासिक पुलिस कमिश्नर संदीप कर्णिक ने कहा कि फिलहाल इस बात की जांच की जा रही है की इन लोगों को बाहर से फंडिंग हुई है या नहीं। इसका संबंध किसी प्रतिबंधित संगठन से है या नहीं। उन्होंने बताया कि आरोपियों का कोई इंटरनेशनल लिंक है या नहीं, कोई ऑर्गेनाइजेशन से संपर्क हैं नहीं, उसकी भी हम जांच कर रहे है। हमने यह सारी जानकारी ATS और NIA से शेयर की है।

जानकारी के अनुसार, TCS धर्मांतरण मामले में अब तक 12 पीड़ितों की पहचान हो गई है। वहीं, 9 FIR भी दर्ज की जा चुकी है। पुलिस ने 7 आरोपियों को अब तक पकड़ा है, जिसमें 6 पुरुष शामिल हैं। आरोपियों की पहचान पहचान दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसारी और महिला प्रबंधक (संचालन) के के तौर पर हुई है। हालांकि, आरोपी नंबर 8 निदा खान अब तक फरार है। निदा कंपनी की एचआर मैनेजर थी, जिसे इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड भी बताया जा रहा है।

TCS में काम करने वालीं में महिलाओं के साथ यौन शोषण और धर्मांतरण का ये खेल साल 2022 से चल रहा था। हालांकि अब इसका खुलासा तब हुआ जब एक महिला कर्मचारी ने शिकायत की कि शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया गया है और उसे धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने की कोशिश की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए नासिक पुलिस ने एक गुप्त ऑपरेशन चलाया था और इस दौरान लगभग एक महीने तक महिला पुलिसकर्मियों समेत अधिकारियों ने कंपनी में हाउसकीपिंग स्टाफ (सफाई कर्मचारी) बनकर काम किया। उन्होंने वहां के माहौल और कर्मचारियों के बीच होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी, जिससे कई अहम सबूत मिले।

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