केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत देश भर की फार्मेसियों से कफ सिरप समेत किसी भी तरह का सिरप खरीदने के लिए ग्राहकों को डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नोटिफिकेशन के लागू होने के बाद, ये दवाएं अब बिना डॉक्टर की पर्ची (OTC) के नहीं मिलेंगी। ऐसे सिरप खरीदने के लिए ग्राहकों को अब रजिस्टर्ड डॉक्टर की लिखी हुई वैलिड पर्ची दिखानी होगी। 9 जून, 2026 का यह नोटिफिकेशन केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल दिसंबर में जारी किए गए एक ड्राफ्ट प्रपोज़ल पर लोगों की राय की समीक्षा करने के बाद जारी किया गया था। इस बदलाव के तहत, सरकार ने ड्रग्स रूल्स के शेड्यूल K में शामिल दवाओं की कैटेगरी से “सिरप” शब्द हटा दिया है। इस बदलाव से सिरप की बिना पर्ची वाली बिक्री (OTC) खत्म हो जाएगी और वे ज़्यादा सख्त रेगुलेटरी नियमों के दायरे में आ जाएंगे, जिसके लिए उन्हें खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची की ज़रूरत होगी।
यह कदम मध्य प्रदेश और राजस्थान में कई बच्चों की मौत का संबंध खराब क्वालिटी वाली खांसी की दवाओं से होने के आरोपों के कुछ महीनों बाद उठाया गया है। इससे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली लिक्विड दवाओं की सुरक्षा और रेगुलेटरी निगरानी को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं। इन घटनाओं के बाद सिरप वाली दवाओं के बनाने, बांटने और बेचने की प्रक्रिया में क्वालिटी की सख्त जांच और कड़े कंट्रोल की मांग फिर से उठी है।
इस रेगुलेटरी बदलाव का मतलब है कि खांसी की आम दवाओं समेत सभी सिरप अब बिना डॉक्टर की सलाह या पर्चे के सीधे नहीं मिल सकेंगे। अब ग्राहकों को फार्मेसी से ऐसी दवाएं खरीदने के लिए रजिस्टर्ड डॉक्टर का लिखा हुआ वैलिड पर्चा दिखाना होगा। उम्मीद है कि इस फैसले का खांसी और दूसरी औषधीय सिरप की आम बिक्री पर काफी असर पड़ेगा, जो पहले बिना पर्चे के आसानी से मिल जाती थीं।
