कानपुर। प्राइवेट सेक्टर में निजले स्तर की नौकरी करना बहुत की कठिन है। नियम केवल दिखावे के लिए होते है, लेकिन पटल पर सच्चाई कुछ और ही होती है। सेलरी के नियमों में लाख वर्तमान सरकार ने संसोधन किया हो लेकिन आज भी लोग प्राइवेट कारखानों में 10 से 12 हजार तो दुकानो आदि में 6 हजार रू0 प्रतिमाह की सेलरी में 10 घंटें से ज्यादा काम कर रहे है। कुछ बडी दुकानों, गार्ड की नौकरी में तो 12 घंटे तक की नौकरी करना लोगों की मजबूरी बन गयी है। ऐसी ही स्थित थाना बिठूर क्षेत्र में देखने को मिली जहां एक निजी फ्ैक्ट्री के पुरूष व महिला कर्मचारी कम वेतन और ओवरटाईम का पैसा कम देने का विरोध किया गया।
बता दें कि सरकारी नियमों को दरकिनार करते हुए बहुत कम सेलरी में लोगों को 8 से 12 घंटे काम करना पडता है। विभागीय सांठ-गांठ से यह खेल चलता है। चैराहो या बडी बजारो में ही नही गली मोहल्लो की दुकानों में भी छोटे-छोटे बच्चों को काम करते देखा जा सकता है। बालश्रम कानून के कानून ही बन कर रह गया। वहीं न्यूनतम सैलरी नियम का भी कहीं कोई पालन नही किया जा रहा है। महिलाऐं व पुरूष दो सौ-तीन सौ रू0 प्रतिदिन के हिसाब से 12 घंटे काम कर रहे है। दादा नगर, पनकी, फजलगंज, चमनगंज जैसे कई क्षेत्र जहां कारखारने है वहां खुलेआम श्रमिको की हक का हनन किया जा रहा है।
इसी क्रम में थाना बिठूर क्षेत्र की एक निजी फैक्ट्र में महिला और पुरूष कर्मचारी सडकों पर उतर आये। उनका कहना था कि फैक्ट्री प्रबन्धन द्वारा उन्हे वेतन कम दिया जा रहा है वो वहीं ओवरटाईम के पैसे में भी कटौती की जा रही है। फैक्ट्री श्रमिकों द्वारा फैक्ट्री का घेराव कर प्रदर्शन किया गया और नारेबाजी की गयीं। हंगामें की सूचना पर पहंुची पुलिस ने श्रमिकों को किसी प्रकार शांत कराया तथा फैक्ट्री प्रबन्धन से बात करने का आश्वासन दिया। हंगामें के चलते लगे जाम को काफी देर में हटवाया जा सका।Iइसी प्रकार गोल्डी मसाला फैक्ट्री के श्रमिकों ने भी वेतन वृद्धि को लेकर प्रदर्शन किया।
