कोलकाता के ताराताला इलाके में बुधवार को तीन मंज़िला निर्माणाधीन गोदाम के ढहने से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और लगभग 15 मज़दूरों के मलबे में दबे होने की आशंका है। इसके बाद सेना, नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फ़ोर्स (NDRF), स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फ़ोर्स (SDRF), पुलिस और फ़ायर सर्विस की मदद से बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया गया। बचावकर्मी तेज़ी से काम कर रहे थे, तभी मुड़े-तुड़े स्टील और कंक्रीट के नीचे से मदद के लिए पुकार सुनाई दी, जिससे उम्मीद जगी कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ और मज़दूर ज़िंदा हो सकते हैं। अब तक 21 मज़दूरों को बाहर निकालकर अस्पतालों में पहुँचाया गया है, जिनमें से कई की हालत गंभीर है। बचाव दल उन लोगों की तलाश कर रहे हैं जिनके मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है।
इमारत गिरने के तुरंत बाद इमरजेंसी टीमें मौके पर पहुंचीं और बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया। राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुरोध पर भारतीय सेना की चार टुकड़ियों को तैनात किया गया। NDRF, SDRF, पुलिस और फायर विभाग के कर्मचारी मलबे के नीचे फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। मुड़े हुए स्टील और कंक्रीट को काटने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि उन जगहों तक पहुंचने के रास्ते बनाने के लिए वर्टिकल ड्रिलिंग की जा रही है जहां बचे हुए लोग फंसे हो सकते हैं। NDRF ने गिरी हुई इमारत के नीचे जीवन के संकेत खोजने के लिए स्निफर डॉग्स और ड्रोन भी तैनात किए हैं। बचावकर्मी बेहद मुश्किल हालात में काम कर रहे हैं और वे सावधानी से मलबा हटा रहे हैं ताकि और कोई हिस्सा न गिर जाए।
