अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता दिशा अरोड़ा महिलाओं और POCSO पीड़िताओं को करती हैं नि:शुल्क कानूनी सहायता

कानपुर। अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता, निदेशक, अचिन्त्य चैरिटेबल फाउंडेशन दिशा अरोड़ा ने शहर की महिलाओं, बालिकाओं और संवेदनशील परिस्थितियों में रहने वाली पीड़िताओं के जीवन में जो ठोस और दीर्घकालिक परिवर्तन लाए हैं, वह आज कानपुर की सामाजिक चेतना व मानवीय संवेदनशीलता का सशक्त उदाहरण बन चुके हैं। उनका कार्य केवल सेवा नहीं, बल्कि एक संकल्प है — और यह कार्य उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच और उनके द्वारा स्थापित मिशन शक्ति की पाँच मूल भावनाओं — सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन, सशक्तिकरण और स्वास्थ्य — के मार्गदर्शन पर चलते हुए किया है।
कानपुर जिला कारागार में दिशा अरोड़ा ने महिला बंदियों के लिए कौशल विकास एवं पुनर्वास कार्यक्रम प्रारंभ करवाया, जिसमें महिलाओं को ब्यूटी, मेक‑अप, ग्रूमिंग, सिलाई‑कढ़ाई एवं परिधान निर्माण जैसी प्रशिक्षण कार्यशालाएँ तथा हस्तकला जैसे व्यावसायिक कौशल सिखाए जा रहे हैं। उन्हें मेहनताना देकर सिलाई कार्य एवं उत्पादन आधारित काम प्रदान किया जा रहा है — जहाँ महिला बंदियों को सिलाई कार्यशाला और वास्तविक सिलाई कार्य दिया गया, जिसके लिए उन्हें भुगतान (मेहताना) भी प्रदान किया गया, जिससे उन्हें आर्थिक सम्मान और आत्मनिर्भरता की भावना को सशक्त किया गया। इस पहल का उद्देश्य उन्हें रिहाई के बाद मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन और रोजगार के अवसर प्रदान करना है — यह मिशन शक्ति के स्वावलंबन और सम्मान की भावना का जीवंत उदाहरण है।
कानपुर के GGIC में दिशा अरोड़ा की प्रेरणा से 450 बालिकाओं के लिए मध्याह्न भोजन योजना शुरू की गई। पहले जहाँ उपस्थिति आधी रहती थी, वहीं अब पोषण और देखभाल की वजह से विद्यालय 100% क्षमता के साथ संचालित हो रहा है। यह प्रयास बच्चियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मविश्वास को मजबूत करता है — मुख्यमंत्री की बालिका सुरक्षा व स्वास्थ्य केंद्रित सोच का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब।
बालिका गृह और महिला बैरक, कानपुर में दिशा अरोड़ा ने मनोवैज्ञानिक परामर्श, भावनात्मक देखभाल और कौशल प्रशिक्षण को निरंतर जारी रखा है। यहाँ बच्चियों को मैक्रेमे, नेल‑आर्ट और मेक‑अप जैसे कौशल सिखाए जा रहे हैं। एक भवन को नवीनीकरण कर प्रशिक्षण एवं सामुदायिक केंद्र में परिवर्तित किया जा रहा है ताकि सुरक्षित वातावरण में बेटियाँ आत्मनिर्भर बन सकें — यह सुरक्षा, सशक्तिकरण और स्वावलंबन का सुंदर संगम है।
स्वरूप नगर बालिका गृह में दिशा अरोड़ा ने स्व‑रक्षा प्रशिक्षण और पारंपरिक नृत्य कक्षाओं की शुरुआत कराई, जो निरंतर जारी हैं। यह पहल बेटियों में शारीरिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक गौरव का निर्माण करती है — यह सुरक्षा और सम्मान के सिद्धांतों की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति है।
एक अधिवक्ता के रूप में दिशा अरोड़ा ने अनेक महिलाओं और POCSO पीड़िताओं को नि:शुल्क कानूनी सहायता प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, वह वन‑स्टॉप सेंटर कानपुर में भी नियमित रूप से नि:शुल्क कानूनी सलाह, परामर्श और मध्यस्थता सेवाएँ प्रदान कर रही हैं, ताकि POCSO पीड़िताओं और महिलाओं को तत्काल और प्रभावी सहायता मिल सके। यह न्याय, सुरक्षा और भावनात्मक सहारे की महत्वपूर्ण कड़ी है।
त्योहारों और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से उन्होंने संस्थागत देखभाल केंद्रों में रह रही बच्चियों को भावनात्मक सुरक्षा, घर जैसा स्नेह और अपनापन प्रदान किया — यह सम्मान और भावनात्मक स्वास्थ्य का आधार है।
पारिवारिक और वैवाहिक विवादों में मध्यस्थता कर दिशा अरोड़ा ने पारिवारिक मूल्यों और महिला सुरक्षा, दोनों का संरक्षण किया है। आवश्यक होने पर महिलाओं के अधिकार और सम्मान को सर्वोपरि रखा — यह सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के सिद्धांतों का आदर्श पालन है।
दिशा अरोड़ा का समाजसेवी और कानूनी योगदान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा और उनके नेतृत्व में महिला सुरक्षा‑सम्मान एवं सशक्तिकरण के संकल्प का अनुकरण है। उनकी पहल आज कानपुर की उन महिलाओं और बालिकाओं के लिए शक्ति, सम्मान और आशा का स्तंभ बन चुकी है जो जीवन में नए अवसरों और सुरक्षित भविष्य की तलाश में हैं।

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