मदनी की सुप्रीम कोर्ट सरकार को धमकी….. जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष महमूद मदनी ने न्यायपालिका और सरकार पर अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर अत्याचार होगा, तो जिहाद होगा” कहकर विवाद खड़ा कर दिया। उनकी इस टिप्पणी पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और उन पर मुसलमानों को भड़काने और संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देने का आरोप लगाया है। मदनी ने आरोप लगाया कि बाबरी मस्जिद और तीन तलाक के मामलों सहित हाल के अदालती फैसलों से पता चलता है कि न्यायपालिका “सरकारी दबाव में” काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि हाल के वर्षों में “ऐसे कई फैसले” सामने आए हैं जिन्होंने संविधान में अल्पसंख्यकों को दिए गए अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन किया है।

उन्हें अपने मुद्दे समझाएँ। अगर ये 60 प्रतिशत लोग मुसलमानों के ख़िलाफ़ हो गए, तो देश में बहुत बड़ा ख़तरा पैदा हो जाएगा। सार्वजनिक चर्चा में जिहाद को जिस तरह से पेश किया जाता है, उस पर आपत्ति जताते हुए मदनी ने मीडिया और सरकार पर एक पवित्र अवधारणा को विकृत करने का आरोप लगाया। उन्होंने लव जिहाद, थूक जिहाद और भूमि जिहाद जैसे लेबलों के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए कहा कि ये सही अर्थ को गलत तरीके से प्रस्तुत करते हैं।

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