बीपीएस न्यूज़, विशेष जागरूकता अभियान
कानपुर। घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न, शोषण या किसी भी प्रकार की आपदा से घिरी महिलाओं के लिए ‘वन स्टॉप सेंटर’ (सखी) आज के दौर में एक मजबूत ढाल बनकर उभरा है। अक्सर कानूनी पचड़ों, पुलिस थानों के चक्कर और समाज के डर से जो महिलाएं चुप रह जाती थीं, उन्हें इस सेंटर के रूप में न्याय की एक नई किरण दिखाई दे रही है।
बीपीएस न्यूज़ की इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको बता रहे हैं कि कैसे यह सेंटर टूटते परिवारों को जोड़ने और पीड़ित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रहा है।
क्या है वन स्टॉप सेंटर और कैसे करता है काम?
शारीरिक या मानसिक रूप से पीड़ित कोई भी महिला या बालिका जब इस सेंटर के दरवाजे पर पहुंचती है, तो उसे अपनी लड़ाई अकेले नहीं लड़नी पड़ती। सरकार द्वारा संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे पांच बड़ी सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराना है:
आपातकालीन सहायता और बचाव: संकट की स्थिति में महिला को सुरक्षित माहौल देना।
चिकित्सकीय सहायता: घायल या अस्वस्थ होने पर तुरंत इलाज की व्यवस्था।
कानूनी सलाह: कोर्ट-कचहरी और कानूनी अधिकारों के लिए मुफ्त विधिक सहायता।
मनोवैज्ञानिक परामर्श (काउंसलिंग) : डिप्रेशन या मानसिक तनाव से उबारने के लिए एक्सपर्ट्स की मदद।
अस्थायी आश्रय (शेल्टर): बिना किसी डर के 5 दिनों तक सेंटर में सुरक्षित ठहरने की व्यवस्था।
वन स्टॉप सेंटर मैनेजर ने बताया:
वन स्टॉप सेंटर मैनेजर वंदना द्विवेदी ने बीपीएस न्यूज़ को बताया कि हमारा प्रयास केवल कानूनी कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि पीड़ित महिला का खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लौटाना है। काउंसलिंग के जरिए हम कोशिश करते हैं कि परिवार टूटने से बच जाएं, लेकिन जहां उत्पीड़न की सीमा पार होती है, वहां हम सख्त कानूनी रुख अपनाते हैं।
24 घंटे खुली रहती है मदद की लाइन
वंदना द्विवेदी ने बताया यह सेंटर पूरी तरह से सक्रिय है और टोल-फ्री नंबर 181 (महिला हेल्पलाइन) या स्थानीय सेंटर के माध्यम से यहाँ चौबीसों घंटे संपर्क किया जा सकता है। यहाँ आने वाली हर महिला की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है, ताकि समाज में उन्हें किसी भी प्रकार की असहजता का सामना न करना पड़े।
बीपीएस न्यूज़ की अपील:
यदि आपके आस-पास कोई भी महिला घरेलू हिंसा, साइबर क्राइम या किसी भी प्रकार के शोषण का शिकार हो रही है, तो डरें नहीं। आवाज उठाएं और वन स्टॉप सेंटर की मदद लें। बदलाव की शुरुआत आपसे ही होगी।
महिला हेल्पलाइन – टोल-फ्री नंबर- 181
