देश के संविधान के साथ खेलता विपक्ष, देश की राजनीतिक अश्मिता के साथ खिलवाड़ करती कांग्रेस, अम्बेडकर पर बयान देकर घिरी भाजपा और हिन्दुओं के साथ प्रतिवाद एवं विश्वासघात में लिप्त सपा अब अलग – अलग कैम्पेन चलाकर वोटरों को फ़साने का मुहिम शुरू करेंगे। गृहमंत्री का बयान और उसे तोड़ मरोड़ कर देश में हंगामा मचाने वाले नेता, संघ की बदौलत सत्ता का रास्ता तय करने वाली भाजपा सबके लिए अब अम्बेडकर चुनौती बनेंगे। सपा वालों के मुखारविंद से पहले बाबा साहेब के प्रति जो असम्मान प्रकट हुआ करता था वह अब अमृतवाणी बनेगा ! कांग्रेस वह दल है जो मात्र दिल की कुटिल बातें ज़ुबां पर आने का मौका ढूढ़ती है। जिनके दिल दिमाग में मनुस्मृति के विरुद्ध नफ़रत कूट कूट कर भरी गई है वे नफरती चिंटू भी जब संविधान के सम्मान में सड़को पर उतरते है तों मक्कारपना सरासर छलकता है और तरस आता है नगीना संसदीय क्षेत्र के लोगो पर जिन्होंने सांप पांला। ज़ब फर्जी नेता संविधान का झूठा सम्मान करते नज़र आते हैं तो तरस आता है जनता पर। संविधान निर्माण समिति प्रमुख एक दलित विद्वान का सम्मान केवल सवर्णो नें निजी हित से परे रख कर किया।
कृमिलेयर में आरक्षण की मलाई चट करने वाले लोग तो बस निजी फायदे के लिए संविधान की दुहाई का स्वांग रच रहें ताकि भाजपा और अमित शाह का विरोध किया जा सकें और कांग्रेस का विरोध करना भी चाहें तों कैसे कर सकते हैं।
दूसरी बात देश में नफ़रत फैलाने की ये भी है कि बाबा साहब ने कभी बौद्ध धर्म की पैरवी नही की पर उनके नाम का प्रयोग कर नव उत्तपन्न जयचंद अपने पचास हजार साथियों के साथ हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना देश को अस्थिर करने के फिराक में है । आज भी बौद्ध धर्म के नाम फरेब परोसने और भड़काऊ धार्मिक बयान देने का सिलसिला जारी है। बाबा साहब ने सभी धर्मों का अध्ययन कर सनातन धर्म को ही सर्वश्रेष्ठ बताया जबकि उनके अनुयायी होने का स्वांग कर रहें नेता अब रामचरित मानस की प्रतियाँ तक जला रहें । उन्होंने देश में तब फैले जात-पात ऊंच नीच और कुप्रथाओं के वशीभूत यह कहा था इस भूमि पर जन्म लेना मेरे वश में नहीं था किन्तु मैं इस भूमि के अनीतियों को धारण किए हुए नहीं मरूंगा। वाकई बाबा साहब के विचारों को भूल केवल सनातन का विरोध धारण करने वाले आज बाबा साहब के हितैषी बन घूम रहें।संविधान के मुताबिक आपकी खुशी ही वास्तविक स्वर्ग का अहसास कराती है। आज मोदी और शाह के खिलाफ जो बोल कुबोल बोले जा रहें वो वह संविधान की बदौलत ही मिला । शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने का काम भी संविधान द्वारा ही सम्पन्न कराया जाता है।
संविधान के मुताबिक हम भारत के लोग ही इस व्यवस्था के लिए जिम्मेदार हैं। स्त्री पुरुष को बराबरी का हक संविधान ही देता है। मनुवाद का विरोध करने के नाम पर अनर्गल लोग अब भी यह बराबरी नहीं चाहते इसलिए वो दबे कुचले गरीबों को फुसलाकर घर बिठाने की सोच के तहत उन्हें भाजपा के खिलाफ, संघ के खिलाफ, सवर्णो के खिलाफ नफरत की अफीम चटाई जा रही । धर्म निरपेक्ष राष्ट्र में सनातन के प्रति घृणा को जन्म दिया जा रहा है। जातिवाद को जातिवादी नेताओं द्वारा बढ़ाया जा रहा है। एक राष्ट्र एक चुनाव की बात होती है तों जातिवादी मानसिकता और जाति जनगणना वाले नेता सदमे में चले जाते है। किंतु इनके द्वारा कभी एक जैसी शिक्षा, समानता, सभी गरीब भारतीय को आरक्षण इत्यादि की मुनादी नहीं पीटी जाती क्यों ! फ़र्क साफ है, इन्हे दुकान चलानी है, ये सब संविधान विरोधी हैं ।
संविधान की 75 वीं वर्षगांठ पर भी गरीबों और पिछडो के ठेकेदार देश के खिलाफ आग उगलते रहे।संविधान की पुस्तक माथे पर लगाकर झांसा देना इन्हें खूब आता है। अंबेडकर जी के अपमान से आज सारा देश उद्वेलित है इसके पीछे यही जातिवादी मानसिकता और जाति जनगणना वाले लोग है जो तमाम विपक्षी दल के नेता हैं। राज्य सभा में प्रतिपक्ष नेता और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमीर करोड़पति पीडीए नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने तो पिछड़े वर्ग से आने वाले प्रधानमंत्री और गृहमंत्री तक को बर्खास्त करने का अल्टीमेटम दिया है। प्रेस कांफ्रेंस में इस तोड़-मरोड़कर दिखाए बयान को जन विरोधी बताते हुए घमंड से कह रहे कि अभी 15 साल और विपक्ष में बैठेंगे। मासूम जनता को सपा कांग्रेस और तमाम विपक्षी दल कब तक मुर्ख बनाएंगे यह देखना दिलचस्प है। भाजपा अब इस मुद्दे पर ना केवल उन्हें घेरेगा बल्कि आगत चुनाव के लिए उनके पतन का पुख्ता इंतजाम कर देगा क्योंकि जिन बाबा साहेब के जगह आपने निजी हित और धर्म विशेष को बिठाया है अब उसे हिंदू राष्ट्र के विगुल नें ध्वस्त कर दिया है।

पंकज सीबी मिश्रा/राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी
