संत राजिन्दर सिंह महाराज ने हजारों लोगों को शांति और सद्भावना का दिया संदेश

कानपुर। सावन कृपाल रूहानी मिशन के अध्यक्ष संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने 6 मार्च, 2025 बृहस्पतिवार को कानपुर के निराला नगर में स्थित पराग डेयरी के निकट, रेलवे ग्राऊंड में सत्संग व नामदान के कार्यक्रम के दौरान अपनी दिव्य उपस्थिति से हजारों लोगों को उभार देकर प्रेरित किया। विश्व-विख्यात आध्यात्मिक गुरु की कानपुर की यह 8वीं यात्रा आध्यात्मिक उत्साह और भक्ति से परिपूर्ण थी, जिसमें भारत और विदेशों से आए भाई-बहनों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत पूजनीय माता रीटा जी द्वारा गुरु अर्जन देव जी महाराज की वाणी से एक शब्द ”तु मेरा पिता, तु है मेरा माता” (हे पिता परमेश्वर आप ही मेरे पिता और माता हो) के गायन से हुई, जिसने उपस्थित संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने हजारों की संख्या में उपस्थित भाई-बहनों को अध्यात्म और दिव्य-प्रेम का गूढ़ संदेश समझाते हुए कहा कि पिता-परमेश्वर सदा हमारे अंग-संग हैं। उन्होंने समझाया कि कैसे हम पिता-परमेश्वर में विश्वास रखते हुए ध्यान-अभ्यास के द्वारा प्रभु के दिव्य-प्रेम और प्रकाश से जुड़कर पिता-परमेश्वर को पाने के अपने जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य को पूरा कर सकते हैं।

उन्होंने आगे समझाया कि मन-इंद्रियों के घाट पर जीते हुए हम अपने जीवन में कई उतार-चढ़ावों का सामना करते हैं। हम अक्सर अपनी ज़िंदगी में अनेक प्रकार की समस्याओं से घिरे रहने के कारण स्थायी शांति और खुशी की तलाश करते रहते हैं। सभी संत-महापुरुष हमें समझाते हैं कि हमेशा-हमेशा की खुशी केवल पिता-परमेश्वर के नाम के साथ जुड़ने में है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब हम इस सृश्टि को रचने वाले प्रभु पर पूरा भरोसा करते हैं तो हमारे सारे डर और चिंताएं दूर हो जाती हैं क्योंकि पिता-परमेश्वर हमेशा हमारी संभाल करते हैं। अंत में उन्होंने समझाया कि हमारे जीवन में सब कुछ पिता-परमेश्वर की इच्छा के अनुसार ही होता है।

जब हम इस गूढ़ सत्य को समझ लेते हैं तो हम शांति और सद्भाव के साथ अपना जीवन जीना सीख जाते हैं। पिता-परमेश्वर ही हमारे सच्चे रक्षक हैं और उनकी संतान होने के नाते हमें जीवन की हरेक चुनौतियों में उनकी सहायता और मार्गदर्शन मिलता है। जब हम किसी आध्यात्मिक गुरु के चरण-कमलों में पहुँचकर उनसे दीक्षा प्राप्त करते हैं तो वे हमें ध्यान-अभ्यास के ज़रिये प्रभु के दिव्य-प्रेम और प्रकाश की यात्रा पर चलना सिखाते हैं। ध्यान-अभ्यास के माध्यम से हम अपने अंतर में सदा-सदा के प्रेम और शांति के स्त्रोत से जुड़ते हुए प्रभु के आनंद का अनुभव करते हैं। यह अनुभव हमें दिव्य प्रेम से भर देता है। जो सांसारिक चिंताओं से परे हमारे जीवन में आनंद और आंतरिक शांति के मार्ग को प्रशस्त करता है।

सत्संग के उपरांत संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने सैकड़ों की संख्या में लोगों को नामदान की अनमोल व दुर्लभ दात से नवाज़ा।
कार्यक्रम के दौरान सावन कृपाल रूहानी मिशन की कानपुर शाखा की ओर से कई प्रकार के मानव-कल्याण के कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिसमें रक्तदान शिविर में सैकड़ों भाई-बहनों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। इसके अलावा कानपुर के शंकरा आँख अस्पताल के सहयोग से 53वां मुफ्त नेत्र जाँच और मोतियाबिन्द ऑपरेशन शिविर का भी आयोजन किया गया। साथ ही साथ मुफ्त वस्त्र-वितरण शिविर में जरूरतमंद भाई-बहनों को वस्त्र, पुस्तकें और जूते आदि का वितरण किया गया।

संत राजिन्दर सिंह जी महाराज को ध्यान-अभ्यास के माध्यम से आंतरिक और बाहरी शांति को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राश्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। वे विश्व-विख्यात ध्यान-अभ्यास के गुरु, ध्यान-अभ्यास पर सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों के लेखक हैं, उनको पिछले 35 वर्शों से शांति, प्रेम और मानव एकता का संदेश फैलाने के लिए संपूर्ण विश्वभर में जाना जाता है।
सावन कृपाल रूहानी मिशन के आज संपूर्ण विश्वभर में 3200 से अधिक केन्द्र स्थापित हैं। मिशन का भारतीय मुख्यालय विजय नगर, दिल्ली में है तथा अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय नेपरविले, शिकागो, अमेरिका में स्थित है।

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