पॉलिथीन में पैक भोजन, पॉलिथीन में पैक की गई सब्जी-दालें और पैक्ड जूस या बिस्किट डायबिटीज की बीमारी दे सकते हैं. यह दावा आगरा में स्थित एसएन मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में किया गया है. अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान प्लास्टिक की चीजों में पैक भोजन किया, उनमें गेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा अधिक था.
हिन्दुस्तान अखबार में छपी खबर के अनुसार, मेडिसिन विभाग ने डायबिटीज के अन्य कारणों का पता लगाने के लिए गर्भवती महिलाओं पर अध्ययन शुरू किया था. कुल 50 महिलाएं अध्ययन में शामिल की गई थीं, इनमें से 30 महिलाओं की सैंपलिंग की गई. इनमें से पांच महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान गेस्टेशनल डायबिटीज पाई गई. सामान्यतौर पर, चार से 18 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं इस डायबिटीज का शिकार होती हैं. अच्छी बात यह है कि प्रसव के बाद 90 प्रतिशत महिलाओं में यह डायबिटीज खुद खत्म हो जाता है.
अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं को गेस्टेशनल डायबिटीज थी, उनमें प्लास्टिक की चीजों में पैक भोजन खाने की आदत अधिक थी. इन महिलाओं ने बताया कि वे अक्सर प्लास्टिक की थाली, गिलास, कटोरी में खाना खाती हैं. वे सब्जियां, दालें, जूस या बिस्किट भी अक्सर पॉलिथीन में पैक करके ले जाती हैं.
अध्ययन में पाया गया कि प्लास्टिक और पॉलिथीन में ‘बिस्फेनाल-ए’ (बीपीए) नामक केमिकल का प्रयोग किया जाता है. यह केमिकल खाने में शामिल होकर कई तरह की बीमारियां देता है. गर्भावस्था में महिलाओं की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है इसलिए यह रोग जकड़ लेता है.
बिस्फेनाल-ए एक हार्मोन डिस्टर्बिंग केमिकल है. यह शरीर के हार्मोन्स को प्रभावित करता है. इससे इंसुलिन के उत्पादन में बाधा आ सकती है. इंसुलिन एक हार्मोन है, जो शरीर में ब्लड शुगल लेवल को नियंत्रित करता है. बीपीए के प्रभाव से ब्लड शुगर लेवल का खतरा बढ़ सकता है और डायबिटीज की बीमारी हो सकती है.
अध्ययन में यह पाया गया कि गर्भवती महिलाओं को प्लास्टिक की चीजों में पैक भोजन से बचना चाहिए. उन्हें घर पर ही खाना बनाना चाहिए या फिर स्टील, कांच या मिट्टी के बर्तनों में खाना खाना चाहिए. गर्भवती महिलाओं को प्लास्टिक की बोतलों में पानी पीने से भी बचना चाहिए. उन्हें स्टील या कांच की बोतलों में पानी पीना चाहिए.
