अतिक्रमणकारियों के बढ़ते हौसले के आगे झुका नगर निगम, नहीं बन पाया यूरिनल

  • नगर विकास मंत्री के निर्देश भी बेअसर, टीम बैरंग लौटी
कानपुर। गोविन्द नगर के नंदलाल चौराहे पर सार्वजनिक यूरिनल निर्माण का मामला अब नगर निगम की कार्यशैली और अतिक्रमणकारियों के बढ़ते हौसलों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। वर्षों से यूरिनल न होने के कारण स्थानीय व्यापारियों, राहगीरों और विशेषकर महिलाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन नगर निगम अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर सका है।
क्षेत्रीय व्यापारियों और गोबिन्द नगर व्यापार मंडल द्वारा दर्जनों IGRS शिकायतों के साथ-साथ नगर विकास मंत्री ए. के. शर्मा को भी शिकायत भेजी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री जी ने स्वयं नगर आयुक्त, कानपुर को सार्वजनिक यूरिनल निर्माण हेतु शिकायत मार्क कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद धरातल पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
बुधवार को नगर निगम की टीम जोन-5 जलकल कार्यालय के बाहर यूरिनल निर्माण की तैयारी के लिए पहुंची, लेकिन अतिक्रमणकारियों के विरोध के आगे पूरी कार्रवाई ठप हो गई। बताया गया कि नगर निगम के सुपरवाइजर कमलेश ने जलकल विभाग की बाउंड्री के बाहर अवैध रूप से कूलर स्टैंड रखकर नगर निगम की जमीन पर कब्जा किए दुकानदार से अतिक्रमण हटाने को कहा। इस पर कब्जेदार ने उल्टा नगर निगम कर्मियों से इस अंदाज में सवाल-जवाब शुरू कर दिया मानो उक्त सरकारी जमीन उसी की निजी संपत्ति हो। उसने साफ तौर पर अतिक्रमण हटाने से इनकार कर दिया।
हैरानी की बात यह रही कि नगर निगम की टीम सरकारी जमीन से कब्जा हटवाने की बजाय बिना कोई कार्रवाई किए वापस लौट गई। परिणामस्वरूप प्रस्तावित यूरिनल का निर्माण फिर अधर में लटक गया। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि दो वर्ष पूर्व कथित नाला निर्माण के नाम पर यहां बने पुरुष एवं महिला यूरिनल तोड़ दिए गए थे, लेकिन आज तक न तो नाला बना और न ही यूरिनल का पुनर्निर्माण कराया गया। इस बीच खाली पड़ी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे भी शुरू हो गए।
वरिष्ठ भाजपा नेता एवं गोबिन्द नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रकाश वीर आर्य एवं अन्य व्यापारियों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब नगर विकास मंत्री तक मामले में निर्देश दे चुके हैं, उसके बाद भी यदि नगर निगम अपनी जमीन कब्जामुक्त नहीं करा पा रहा, तो यह प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पहले बुलडोजर चलाकर सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराया जाए, तभी वहां सार्वजनिक यूरिनल का निर्माण संभव हो सकेगा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम लगातार “वित्तीय संसाधनों” का बहाना बनाकर मामले को टालता रहा, जबकि असली बाधा अब अतिक्रमण और प्रशासनिक ढिलाई बन चुकी है। क्षेत्रीय व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

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