कानपुर। भूजल सप्ताह के अवसर पर भूगर्भ जल विभाग एवं डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया (WWF-India) के संयुक्त तत्वावधान में क्राइस्ट चर्च इंटर कॉलेज, कानपुर में जल संरक्षण जागरूकता कार्यशाला एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में भूगर्भ जल संरक्षण, सतत जल प्रबंधन तथा जल के जिम्मेदार एवं विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूकता विकसित करना था।
कार्यक्रम में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया की विशेषज्ञ आंचल मित्तल ने अर्बन वाटर फुटप्रिंट अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को वाटर फुटप्रिंट की अवधारणा, दैनिक जल उपयोग का आकलन करने के लिए वाटर कैलकुलेटर के महत्व तथा जल की बर्बादी रोकने के सरल एवं प्रभावी उपायों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक व्यवहार में छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर जल संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
इसके उपरांत भूगर्भ जल विभाग की हाइड्रोलॉजिस्ट अर्चना सिंह एवं जूनियर इंजीनियर गोपाल गुप्ता ने विद्यार्थियों को भूगर्भ जल संरक्षण के प्रभावी उपायों की जानकारी दी। उन्होंने वर्षा जल संचयन, जल का विवेकपूर्ण उपयोग तथा भावी पीढ़ियों के लिए भूजल संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान भूगर्भ जल विभाग के अधिकारियों ने सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई। सभी प्रतिभागियों ने जल का सदुपयोग करने तथा समाज में जल संरक्षण का व्यापक संदेश प्रसारित करने का संकल्प लिया।
कार्यशाला में लगभग 123 विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस अवसर पर लगभग 100 प्रतिभागियों से वाटर कैलकुलेटर फॉर्म भी भरवाए गए, जिससे उन्हें अपने दैनिक जल उपयोग का आकलन करने तथा जल संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित जल संरक्षण विषयक चित्रकला प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रतिभागियों ने जल संरक्षण पर आधारित आकर्षक, रचनात्मक एवं प्रेरणादायी चित्रों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने का प्रभावी संदेश दिया।
कार्यक्रम का समापन जल संरक्षण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। वक्ताओं ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे स्वयं जल संरक्षण के उपाय अपनाने के साथ-साथ अपने परिवार, मित्रों एवं समाज को भी इसके प्रति जागरूक करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं पर्याप्त जल संसाधन सुनिश्चित किए जा सकें।
