ये क्या! होटलों में मिल रहा नकली पनीर: मंत्री विखे पाटिल

महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने सोमवार को एक चौंकाने वाला दावा किया. उन्होंने कहा कि राज्य के कई होटलों में मिलने वाला पनीर असली दूध से नहीं, बल्कि वनस्पति तेल से बनाया जाता है. उन्होंने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि बाजार में सिर्फ असली दूध से बना पनीर ही बिके और दूध उत्पादकों को इसका सीधा फायदा मिले.

होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन (AHAR) के अध्यक्ष अरविंद शेट्टी ने मंत्री के दावे पर आपत्ति जताई और कहा कि बिना सबूत ऐसा बयान नहीं देना चाहिए. उन्होंने बताया कि मुंबई में 8,000 और पूरे महाराष्ट्र में 22,000 रेस्टोरेंट हमारे एसोसिएशन से जुड़े हैं और कोई भी मिलावटी पनीर इस्तेमाल नहीं करता. शेट्टी ने कहा कि हम ग्राहकों को सिर्फ असली दूध से बना पनीर ही परोसते हैं, जिसे सही तापमान पर रखा जाता है. साथ ही हमारे सभी सदस्य रजिस्टर्ड सप्लायर्स से सामग्री लेते हैं, नियमित जांच कराते हैं और खाने की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखते हैं.

शेट्टी ने कहा कि ढाबों और सड़क किनारे खाने बेचने वालों की जांच जरूरी है. उन्होंने माना कि हर बाजार में मिलने वाला पनीर साफ और दूध से बना हो, यह कहना मुश्किल है. उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन को सड़क किनारे के फूड स्टॉल, हाइवे के ढाबों और छोटे रेस्टोरेंट्स की नियमित जांच करनी चाहिए. शेट्टी ने यह भी माना कि मंत्री सही कह रहे हैं कि खाने में शुद्ध दूध का इस्तेमाल होना चाहिए, जिससे गाय पालकों को भी फायदा मिले. लेकिन इसे लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को स्ट्रीट फूड स्टॉल्स की जांच कर खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए.

विखे पाटिल ने कहा कि कुछ साल पहले केंद्र सरकार ने वनस्पति तेल से पनीर बनाने की अनुमति दी थी. इसी वजह से होटलों में मिलने वाला ज्यादातर पनीर दूध से नहीं, बल्कि वनस्पति तेल से बनाया जाता है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ जगहों पर असली दूध से बना पनीर मिल सकता है.

विखे पाटिल ने कहा कि वे पहले भी मिलावटी पनीर के उत्पादन पर रोक लगाने की कोशिश कर चुके हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार जल्द इस पर प्रतिबंध लगाएगी. मंत्री ने यह भी कहा कि अगर मिलावटी पनीर पर रोक लगती है, तो हर दिन पनीर बनाने के लिए 40 लाख लीटर दूध का इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे दूध उत्पादकों को सीधा फायदा मिलेगा.

मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार देसी गायों के पालन को बढ़ावा दे रही है. उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया था कि राज्य सरकार प्रति गाय 50 रुपये रोजाना खर्च करेगी. इसके अलावा उन्होंने जोर दिया कि राज्य सरकार के सहयोग से दूध उत्पादन और उसके सही उपयोग को बढ़ाने के लिए विभिन्न उपायों पर काम किया जाना चाहिए.

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