व्यंग्य : जातिमेव जयते…! 

अल सुबह ही मुसद्दीलाल को सोशल मिडिया से पता चला कि सुनील शेट्टी की 15 महीने की पोती मोदी जी की उनसे बड़ी फैन है। नेता मुसद्दीलाल तिलमिला गए। कहाँ मुसद्दीलाल हर रविवार मन की बात सुनने का पोस्टर सबसे पहिले जारी करते थे और कहाँ अब ये खबर की 15 महीने की पोती का मोदी जी तगड़ा कनेक्शन  ! मुसद्दीलाल ने टीवी खोला तो एक पॉडकास्ट में सुनील शेट्टी बता रहे हैं कि उनकी पोती मोदी जी की फोटो निहारती रहती है और उनकी पूजा करती है। मुसद्दीलाल की आत्मा जागृत हो उठी।  मुसद्दीलाल के अंडरपास से आवाज आई कि जरूर इस बच्ची का पूर्व जन्म में मोदी से कनेक्शन होगा और आने वाले समय में यह महाराष्ट्र की राजपाल टाइप की कुछ बनेगी।

तभी मुसद्दीलाल को ध्यान आया, अभी मेरी बेटी क्या कर रही होगी। सुनील शेट्टी की पोती पंद्रह महीने की ही है, मेरी बेटी तो पंद्रह साल की हो गई है। सुबह के आठ से ज्यादा बजने वाले हैं। मुसद्दी नेता ने घर श्रीमती जी को फोन किया तो पता चला, अभी लाडली सोई हुई है। इसी साल दसवीं में पास हुई है और ग्यारहवीं में एडमिशन के बाद भी अभी तक नीद मुद्रा में है।   लेकिन फिर उन्हें याद आया की उसके बिटिया के कमरे की दीवारों पर या किसी टेबल, रैक आदि पर मोदी जी की फोटो तो है ही नहीं। ऐसा नहीं कि घर में फोटो नहीं हैं। कई हैं पर उसके कमरे में तो एक में विराट कोहली बल्ला उठाए है, एक में नेहरू जी मुस्कुरा रहे हैं, दूसरी दिवार पर गौतम बुद्ध की ध्यानमग्न मुद्रा वाली फोटो है और दरवाजे पर बाबा साहब किताब लेकर खड़े है बस मोदी जी नहीं है। अफसोस हो रहा है कि मोदी की फोटो जब मैंने खुद के अंतर्मन में टांगी ही नहीं तो मेरे बच्चे प्रेरित होंगे कैसे। अब अगर कभी निहारेंगे भी तो जो दीवार पर टंगी निस्सार लोगों की फोटोज हैं, उन्हें ही तो…।

ऊपर से, मेरे बच्चों का दिमाग मै ने ही खराब किया है। भाजपा में भले अपने जातिवादी मानसिकता और वोटरों के भरोसे हूँ पर टीवी या टैब आदि पर बच्चों को रवीश कुमार, ध्रुव राठी अभिजीत दिमके, रावन जैसों की वीडियोज देखने के लिए प्रेरित करता हूँ क्यूंकि कल को क्या पता भाजपा सवर्णो की पार्टी फिर से बन जाए ! मैं पार्टी में मलाई खा रहा इसके चक्कर में अपने बच्चे पर बाप की सीख तो असर करती ही है। बड़े हो रहे हैं तो शायद अब मोदी जी के प्रति प्रेम जगे !  हालांकि, तब तक मोदी जी की जगह अपने शाह जी के बेटे जय जी जगह ले लेंगे उनकी फोटू लगानी होगी या क्या पता, श्रद्धेय योगी जी विराजने लगें। क्या फर्क पड़ता है? राम के अवतार के बाद कृष्ण का ही तो अवतार हुआ था और अधिक कलाओं से युक्त। सुनते हैं, राम से भी अधिक कलाएं कृष्ण के पास थीं। सोलह कला शायद। तय है कि मोदी के बाद अगर शाहावतार हुआ या बुलडोजर अवतार हुआ तो वे और अधिक कलाएं दिखाएंगे। देश भी तब तक विश्वगुरु की पोस्ट पर कन्फर्म हो जाएगा, जातिवाद का धंधा भी तब तक खूब व्यापक स्तर तक फैल जाएगा। युवा होते बच्चे कब इन नौकरी सौकरी के जाल में उलझ जाएं, कौन बता सकता है मेरे बच्चों को तो आरक्षण और नौकरी फिक्स है  !

हर बाप की तरह मुसद्दीलाल भी अपने बच्चों से अपने अनुसार चलने की उम्मीद करते है और यही सीख भी उन्हें दे रहें । एकाध साल पहले एक दिन मेरा ध्यान गया कि फलाने प्रदेश अध्यक्ष जी भी तो गैर सवर्ण है और अपनी जाति के दम पर आरक्षण और मंत्री पद की मलाई जम कर खाए हुए है और अब मोदी जी की फोटो लगाकर खूब माल भूना रहें उनका बीए में पढ़ने वाला बेटा टीवी पर कोई न्यूज चैनल लगाए है और कोई रवीश टाईप का एंकर खूब जोर जोर से चीख रहा है।  वही हिंदू मुसलमान, मंदिर मस्जिद, देशद्रोही टाइप कोई मुद्दा था। देखते ही मै डर गया कि बच्चे यह सब क्या देख रहे हैं। मै ने बाकायदा चैनलों के नाम गिना दिये कि इन सबको देखना मना है पार्टी में , बल्कि इनका नाम नजर आते ही क्लिक करना मना है, और, ये सब जो सूट टाई धारी सजीले एंकर और स्मार्ट सुंदर टाइप एंकरानियां हैं वे इसलिए लाखों का पगार दे कर नियुक्त हैं कि तुम्हारे जैसी नई पीढ़ी के बच्चों का दिमाग खराब कर दें। बुजुर्गों में तो जिनका दिमाग खराब होना था हो चुका है तभी तो देश और समाज का यह हाल है।

नई उम्र के बच्चों में ऐसा विवेक अगर जग सके कि वे सही चीजें देख पढ़ सकें तो उनका भी भला हो। देश और समाज का भी भला हो।  हमारी पीढ़ी ने “हम लाएं हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के” वाला गाना अपने बचपन में सुना लेकिन किया उसका उल्टा। “इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के” की जगह बाप दादा की पीढ़ी ने जो आरक्षण की किश्ती तूफान से निकाल कर उसकी पतवार हमें सौंपी, हम उसे एक नए भँवर में खींच लाए। अब, पेंशन खत्म, सरकारी नौकरी के पदों का थोक के भाव से खात्मा, प्राइवेट नौकरियों में इतना भी वेतन नहीं कि “जामे कुटुम समाय”, आगंतुक “साधु” की तो बात ही क्या। नौकरी में अपने हक और हित के लिए थोड़ी सी भी आवाज उठाई तो पीठ नहीं, चू… पर लात मार कर बाहर कर दिए जाने का खतरा, काम इतना अधिक कि जवानी में बूढ़े हो जाएं, छुट्टियों की बात करना अपराध, अस्पतालों का निजीकरण, पढ़ाई की फीस इतनी महंगी कि बच्चों के बाप का दम निकल जाए…आदि…आदि।

उधर सवर्णो के बाप दादा ने आजादी के समय जुलूस निकाल कर, अनशन धरना करके, जेल जाकर, ज्ञापन सौंप कर, सत्याग्रह करके जो भी हक और सुविधाएं हासिल की, जैसा समाज बनाने का सपना देखा,सवर्णों की पीढ़ी एक एक कर सब गंवाती गई। उन्होंने पाया क्या…? घंटा असली मलाई तो हम खा रहें बस मोदी जी की विश्वगुरु वाला फोटू टांग कर और चेपकर । बड़े हो रहे बच्चों में यह विवेक जगाना होगा कि सूचना प्रदूषण और चारों ओर फैले भ्रमजाल के दौर में वे क्या देखें, क्या सुनें, क्या पढ़ें।  सुनील शेट्टी जैसों की पोती तो मोदी की फोटो निहारना अफोर्ड कर सकती है, पर अपने धर्मेंद्र प्रधान की दया से अब सवर्णों के बच्चे उतने बड़े महामानव की फोटो निहारना अफोर्ड नहीं कर सकते। उन्हें आगे देखना होगा, उस फोटो के पीछे छिपे अंधियारे की पहचान करनी होगी, उस फोटो के साथ दिख रहे आभामंडल की कृत्रिमता की पहचान करनी होगी।

उनके लिए हम सबने दुनिया को, जिंदगी जीने की परिस्थितियों को बेहद कठिन बनाने में, उनकी राहों में काँटे बिछाने में  अपनी जिंदगी खपा दी। उतनी श्रद्धा कैसे अफोर्ड करें हमारे जैसों के बच्चे कि आज मोदी की फोटो निहारें और कल के शाहावतार की आकुल प्रतीक्षा करें या कि योगी के लिए व्याकुल हो पुकार लगाएं “तारणहार आएगा, तारणहार आएगा।”  हम जातिवादी नेतागण सवर्णों के बच्चों में इतना विवेक जाग्रत होने ही नहीं देंगे  कि वे अपने लिए, अपनी भावी पीढ़ियों के लिए बेहतर दुनिया, बेहतर समाज बना सकें। तब वे अपना नेता हमें खुद ही चुन लेंग। विवेकशील जनता ही लोकतंत्र की असली शक्ति है। तब सवर्ण लोगो की मर्जी ही नहीं चलेगी की वह राहुल गांधियों, अखिलेशों, तेजस्वियों को भी खारिज कर दे। बस वो बड़े – बड़े डायलॉग मारे , अपने पूर्वजों के त्याग, बलिदान को पहचाने ।

स्वतंत्रता संघर्ष का इतिहास पढ़े। उसके बाद के दौर में भीषण गरीबी, पिछड़ेपन, भूख, अशिक्षा आदि से लड़ने वाले अपने दादा, परदादा की पीढ़ी को याद करे। उन्हें पता है कि उनके पूर्वजों ने कैसे झंझावातों से देश को बाहर ला कर दुनिया में एक पहचान दिलाई, एक मुकाम दिया। सवर्ण और  बड़े लोगों के बच्चे अगले अवतार की प्रतीक्षा करें, वर्तमान अवतार की फोटो निहारें। हम जैसों के बच्चों को तो सब मुफ्त का मिलेगा ही बस उन्हें मोदी – शाह में विवेक जाग्रत करना होगा, करप्शन में लगे चार्ज से जूझने का कौशल हासिल करना होगा। जातिमेव जयते।

पंकज सीबी मिश्रा, पत्रकार एवं व्यंग्यकार जौनपुर यूपी

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