लखनऊ, नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के जमुई सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी अरुण भारती ने आरक्षण विरोधी आंदोलनकारियों से मुलाकात करने पर यूपी के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि आरक्षण बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है, कोई भीख या खैरात नहीं है, जिसे कोई चिट्ठी लिखकर खत्म कर सके।ब्रजेश पाठक से पूछे सीधे सवालसांसद अरुण भारती ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि संवैधानिक पद की मर्यादा: “आप एक जिम्मेदार और संवैधानिक पद पर बैठे हैं।
जब आप किसी समाज को मिले संवैधानिक अधिकार को छीनने की वकालत करते हैं, तो यह कहां से न्यायोचित है? “ब्रजेश पाठक जी को स्पष्ट करना चाहिए कि वह किन लोगों से मिले, किसका संदेश लिया और किसकी चिट्ठी लेकर दिल्ली (केंद्रीय नेतृत्व के पास) गए हैं? आंदोलनअरुण भारती ने देश में चल रहे ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ पर गहरी आपत्ति जताते हुए इसे इतिहास का पहला नकारात्मक आंदोलन करार दिया। देश में अब तक गरीबी हटाओ, भेदभाव हटाओ या दहेज हटाओ जैसे सकारात्मक आंदोलन हुए हैं, लेकिन यह पहली बार है जब दूसरों का अधिकार छीनने के लिए कोई आंदोलन किया जा रहा है। देश के युवाओं के सामने बेरोजगारी और अवसरों की कमी एक वास्तविक समस्या है। लड़ाई रोजगार और अवसरों को बढ़ाने के लिए होनी चाहिए, न कि वंचितों के आरक्षण को खत्म करने के लिए।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद तब गरमाया जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के बाद ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से जुड़े छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात की थी। उपमुख्यमंत्री ने छात्रों की इस मांग को “आरक्षण सुधार” का नाम दिया और उनकी मांगों का मांग-पत्र (चिट्ठी) बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने का भरोसा दिया था। इसी बात से नाराज होकर एनडीए के सहयोगी दल एलजेपी (आर) के सांसद ने अपनी ही गठबंधन सरकार के उपमुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
