ड्यूटी कटवाने की कतार में दिव्यांग शिक्षकों का जज्बा, जनगणना में निभाने की ठानी जिम्मेदारी

कानपुर। जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच जिलाधिकारी के समक्ष रोजाना दर्जनों प्रकरण पहुंच रहे हैं, जिनमें कार्मिक अलग-अलग बहानों से ड्यूटी कटवाने की जुगत में लगे हैं। इसी माहौल में कुछ उदाहरण ऐसे भी सामने आए हैं, जिन्होंने कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना की अलग मिसाल पेश की है।
पं. जवाहर लाल नेहरू इंटर कॉलेज, जामू में तैनात सहायक अध्यापक विजय बहादुर 80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता की श्रेणी में आते हैं जनगणना में उनकी ड्यूटी जोन-1 के प्रगणक के रूप में लगाई गई है। नियमों के अनुसार वे छूट के पात्र हैं।  उनका मानना है कि जनगणना देश की योजनाओं की आधारशिला है और इसमें हर कार्मिक की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने अन्य कार्मिकों से भी आह्वान किया है कि वे बहानों से ऊपर उठकर इस राष्ट्रीय कार्य में योगदान दें। हरजिंदर नगर इंटर कॉलेज में तैनात सहायक अध्यापक जयप्रकाश शर्मा का जज्बा भी उल्लेखनीय है।
कृत्रिम पैर होने के बावजूद उन्होंने जनगणना के दायित्व को प्राथमिकता दी और स्पष्ट किया कि शारीरिक सीमाएं कर्तव्य निर्वहन में बाधा नहीं बननी चाहिए। प्राथमिक विद्यालय सदिकामऊ, शिवराजपुर में कार्यरत शिक्षा मित्र दाहिने पैर से दिव्यांग मधु सिंह ने ड्यूटी हटाने के बजाय उसे सुगम बनाने का विकल्प चुना।जिलाधिकारी ने इसे सहर्ष स्वीकार करते हुए उनकी ड्यूटी को जोन-1 से हटाकर उनके घर के पास निर्धारित कर दिया, जिससे वे बिना अतिरिक्त कठिनाई के अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने ऐसे कार्मिकों के जज्बे को प्रेरक बताते हुए कहा कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में इनकी प्रतिबद्धता अन्य लोगों के लिए उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि जहां आवश्यक हो, वहां मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्मिकों को सहयोग दिया जाए, लेकिन जिम्मेदारी निभाने की भावना ही व्यवस्था को मजबूत बनाती है।

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