कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘आंतरिक समिति’ का गठन और ‘शी-बॉक्स’ पोर्टल पर विवरण अपलोड करना अनिवार्य

कानपुर, बीपीएस न्यूज। कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण प्रदान करने के उद्देश्य से प्रशासन ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह ने महिला कल्याण निदेशालय, उत्तर प्रदेश (लखनऊ) के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए बताया कि जिले के सभी सरकारी, गैर-सरकारी, निजी कंपनियों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और निजी फर्मों में जहाँ 10 या उससे अधिक कर्मचारी (महिला एवं पुरुष) कार्यरत हैं, वहाँ आंतरिक समिति (Internal Committee – IC) का गठन करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

यह कार्रवाई कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH Act) के तहत की जा रही है।

‘शी-बॉक्स’ (SHe-Box) पोर्टल पर विवरण अपलोड करना ज़रूरी

जिला प्रोबेशन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि केवल आंतरिक समिति का गठन कर लेना ही काफी नहीं होगा। समिति के अध्यक्ष और सभी सदस्यों की पूरी जानकारी केंद्र/राज्य सरकार द्वारा संचालित शी-बॉक्स (SHe-Box – Sexual Harassment electronic Box) पोर्टल पर दर्ज (अपलोड) कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

शी-बॉक्स क्या है? शी-बॉक्स भारत सरकार द्वारा तैयार किया गया एक सिंगल-विंडो ऑनलाइन पोर्टल है, जिसके माध्यम से किसी भी संस्थान की महिला कर्मचारी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायत दर्ज करा सकती है। इस पोर्टल पर दर्ज विवरण से शासन स्तर पर निगरानी रखी जाती है।

जिला प्रशासन की सख्त अपील व दिशा-निर्देश

जिन संस्थानों या प्रतिष्ठानों ने अभी तक आंतरिक समिति का गठन नहीं किया है या जिसका विवरण पोर्टल पर अपलोड नहीं हुआ है, उनके लिए प्रशासन ने निम्नलिखित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:

  • तत्काल गठन एवं विवरण अपलोड: ऐसे सभी संस्थान बिना किसी देरी के आंतरिक समिति का गठन करें और उसकी जानकारी तुरंत शी-बॉक्स पोर्टल पर अपलोड करें।
  • कार्यालय को भेजें दस्तावेज: समिति गठन से संबंधित आवश्यक अभिलेखों/दस्तावेजों की एक प्रति जिला प्रोबेशन कार्यालय, कानपुर नगर की आधिकारिक ई-मेल आईडी पर भेजना सुनिश्चित करें:

नियमों के अनदेखी पर हो सकती है कार्रवाई

प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों द्वारा इस नियम की अनदेखी करने या आंतरिक समिति का गठन न करने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ कानून के तहत नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। अतः जिले के सभी छोटे-बड़े निजी व सरकारी संस्थान समय रहते इस प्रक्रिया को पूरा कर लें।

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