उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की ‘मिलन का समय’ वाली टिप्पणी पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव 2017 से ही संविधान खतरे में होने का राग अलाप रहे हैं, जबकि संविधान पूरी तरह से सुरक्षित है और खतरे में उनकी राजनीतिक जमीन है। राजभर ने कहा कि आज उन्हें सहारा देने वाला कोई व्यक्ति है? कहां से जीतेंगे?
ओपी राजभर ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, ‘2017 से वह चिल्ला रहे हैं कि संविधान खतरे में हैं। संविधान सुरक्षित है, खतरे में अखिलेश जी हैं। 20% आबादी वाले मुसलमान ने वोट देकर उन्हें चार बार मुख्यमंत्री बनाया। एक बार भी उनके जहन में यह बात नहीं आ रही है कि किसी भी मुसलमान को सीएम चेहरा घोषित करें? वे जो बोल रहे हैं कि भाईचारा का चुनाव है, ये दौलत का चुनाव है।’
उन्होंने सपा के पीडीए फॉर्मूले पर निशाना साधते हुए कहा, ‘आपने देखा कि पीडीए चलाते हैं। परिवारवाद-रामगोपाल, धनराज-दौलतराम अब तीसरे अपराधीराम आने वाले हैं। यही उनका पीडीए है। उन्होंने 2017 का चुनाव मिलकर लड़कर देख लिया है। यादव और मुसलमानों ने उन्हें वोट दिया। कांग्रेस का वोट भी शामिल रहा। साल 2022 में हम उनके साथ थे।’
राजभर ने आगे कहा, ‘आज उनको कौन सा सहारा देने वाला कोई व्यक्ति है? कहां से जीतेंगे? जो वो बोल रहे हैं उनको अब इस बात का एहसास हो गया है कि हमारी सरकार नहीं आने वाली है हम अपने लिए क्या व्यवस्था कर लें उसके लिए वो लगे हुए हैं।’
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, ‘राज्यसभा चुनाव का समय है और राज्यसभा चुनाव का समय मिलन का समय होता है। अपनी पुरानी गलतियों को भूलकर, दूसरों के साथ, सिद्धांत के साथ खड़े हो जाने का एक बार मौका मिलता है। अगर किसी को लगता है कि हमारे लोकतंत्र, हमारे संविधान, देश की हमारी अर्थव्यवस्था पर हमला हो रहा है, महंगाई बढ़ रही है, पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है, अगर उन्हें लगता है कि ये सब गलत फैसले है तो राज्यसभा चुनाव से पहले मिलन का समय आता है। कड़वी बातें सब भूलकर मिलना चाहिए। हमारी संस्कृति और परंपरा यह रही है कि कितने भी पाप कर लो, अगर मां गंगा मं स्नान ले लो तो पाप धुल जाते हैं। हम तो केवल इतना ही कह रहे हैं कि जो रास्ता भूल गए हैं, जो साथी साथ आना चाहते हैं, उनके लिए हम सभी पुरानी चीजें भूल जाएंगे।’
